Monday, June 14, 2021
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बच्चों को अंधविश्वास का साथी बनाकर नस्लें तबाह कर रहे हैं हम

HIMACHAL NAZAR | सरकाघाट में बुजुर्ग महिला को अंधविश्वास और देवता ने नाम पर प्रताड़ित करना जितना शर्मनाक है उतना ही गंभीर विषय है वीडियो में बच्चोंं का धार्मिक जयकारे लगाना। बच्चों के धार्मिक जयकारे लगाने पर तो किसी कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन वीडियो में जिस संदर्भ में बच्चे नारे लगा रहे हैं उसका मतलब उन्हें भी नहीं पता।

भीड़ विधवा बुजुर्ग महिला को जूते पहना कर और कालिख पोत कर जलील कर रही है और बच्चे धार्मिक नारे लगा रहे हैं। बच्चे सांचे दरबार की जय कहते हुए और भी नारे लगाते हैंं। अब बच्चे तो सही काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ये कहां पता कि नारे उस स्थिति का संदर्भ क्या है। बच्चों को तो यही बताया गया होता है कि भगवान है और गलत करने वाले को यह सजा देता है, लेकिन प्रौढ़ और समझ रखने वाले लोगों की वजह से बच्चे भी इस पाप के भागीदार बन रहे हैं।

सुनें बच्चे कैसे नारे लगा रहे हैं

खैर बच्चों को तो इस उम्र में इस पूरे घटनाक्रम को समझने लायक सोच विकसित नहीं हुई है। बच्चे सिर्फ इतना जानते हैं कि बड़े बुजुर्ग जो काम कर रहे हैं वही सही है। अब इन बच्चों को इस समय सही और गलत का फर्क नहीं बताया गया तो ताउम्र इस घटना की छाप उनकी यादाश्त में रहेगी और जिंदगी भर वह इसी अंधविश्वास में जीते रहेंगे कि डायन और देवता लगाने वाली औरते होती हैं।

पूरे घटनाक्रम के बाद बच्चे घर गए होंगे और यही सोचते रहे होंगे की किसी के देवता लगाने से अनिष्ठ होता है। ऐसी औरतें ठीक नहीं होती और इनका इलाज यही होता है। यह सब उनके जहन में एक छाप की तरह रहेगा और यह छाप ही समाज के लिए श्राप बनेगी।

सरकाघाट का वीडियो वायरल होने के बाद तो मामले ने तूल पकड़ लिया, लेकिन आप अपने आस-पास सभी जगह देख सकते हैं कि आप बच्चों को क्या शिक्षा दे रहे हैं। देवी-देवता ने नाम बच्चों को सच बताया जा भी रहा है या उन्हें धोखे में रखकर हम अपना ही भविष्य और नस्लें तबाह कर रहे हैं।

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