Monday, June 14, 2021
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हिमाचल के दो गांव जहां इस डर से नहीं मनाई जाती दीवाली

आज हर जगह दीवाली की धूम है। घरों में को सजाया जा रहा है रिश्तेदारों के लिए मिठाइयां खरीदी जा रही है तो बच्चे रात होते ही पटाखे फोड़ने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हिमाचल के दो ऐसे गांव भी हैं जहां दीवाली का त्यौहार ही नहीं मनाया जाता। एक गांव है हमीरपुर जिला का सम्मू गांव तो दूसरा कांगड़ा जिला की पालमपुर तहसील का अटियाला दाई।

दोनों ही जगहों पर दीवाली न मनाने की वजहें अलग-अलग हैं। पहले बता करते हैं सम्मू गावं की। बताया जाता है कि कभी दीवाली के दिन एक महिला अपने बच्चे के साथ ससुराल से मायके जा रही थी। महिला का पति फौजी था। मायके जाते समय उसे रास्ते में ही पति की मौत की खबर पता लगी और उसने बच्चे सहित प्राण त्याग दिए। कहा जाता है कि वह सती हो गई।

उस दिन के बाद गांव में दीवाली नहीं मनाई गई। समाचार पत्रों पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक गांव वाले जब भी दीवाली का त्यौहार मनाने की कोशिश करते हैं कोई न कोई अनहोनी हो जाती है। कभी किसी के घर में आग लग जाता है तो कभी गांव में ही किसी की मौत हो जाती है। दीवाली के दिन दीये तो जलाए जाते हैं, लेकिन त्यौहार के दिन कोई पकवान या पटाखे नहीं चलाता। गांव वालों के मुताबिक यज्ञ करवा श्राम मिटाने की भी कोशिश की गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

दूसरा गांव है कांगड़ा जिला की पालमपुर तहसील का अटयाला दाई। यहां भी कई दशकों से दीवाली नहीं मनाई गई। हालांकि यहां के लोग कहते हैं समय के साथ युवा और बच्चे थोड़े बहुत पटाखे चलाते हैं, लेकिन गांव के बुजुर्ग आज भी पुराने किस्सों का हवाला देते हैं। बताया जाता है कि कई दशकों पहले गांव में बीमारी फैल गई। गांव के एक बुजुर्ग को सपना आया और उसने गांंव को बचाने के लिए समाधि ले ली।

कहा जाता है बुजुर्ग ने समाधि लेने से पहले बुजुर्ग ने गांव वालों से आज के बाद दीवाली न मनाने का वचन लिया और कहा कि अगर दीवाली मनाओगे तो श्राप लगेगा। दोनों की किस्सों का आज कोई प्रत्यक्ष गवाह हो ऐसा नहीं दिखता, लेकिन फिर भी दोनों गांव में लोग आज भी दीवाली मनाने से डरते हैं। अब इस मामले में प्रशासन को ही पहल कर लोगों से बातचीत करनी चाहिए ताकि लोगों के बीच से इस डर का समाधान निकाला जा सके।

आप भी जानते हैं कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में तो हमें लिखें। आपके नाम के साथ कहानी प्रकाशित की जाएगी।

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