HIMACHAL NAZAR| सोशल मीडिया में सुबह-सुबह सिरमौर जिला में स्कूल हादसे की खबर फैल गई। धड़ाधड़ लिंक शेयर किए जाने लगे और लोग फेसबुक ग्रुप्स में स्टेटस शेयर करने लगे, जिसमें बताया जा रहा था कि सिरमौर जिला में स्कूल बस खाई में गिर गई है। हादसे में दस बच्चों की मौत हो गई है और दस घायल हैं।

कुछ लोगोंं ने स्टेटस शेयर करने के साथ यूट्यूब का एक लिंक भी दिया था। इस वजह से हादसे की अफवाह ज्यादा तेजी से फैली। हैरानी की बात यह है कि एक तथाकथित न्यूज पोर्टल ने भी इस फर्जी और पुराने हादसे की खबर को अपने फेसबुक पेज पर शेयर कर दिया। सुबह-सुबह जैसे ही किसी एक व्यक्यित हादसे की खबर को फेसबुक पर सांझा किया लोग धड़ाधड़ इसे शेयर करने लगे।

दरअसल यह खबर पुरानी थी। खबर शेयर करने के साथ ही यूट्यूब का एक लिंक दिया गया था। उस पर क्लिक करने पर एबीपी न्यूज हिंदी का चैनल खुल रहा था जहां हादसे की खबर चल रही थी। इस कारण से अफवाह फैली। दरअसल लोगों ने ध्यान ही नहीं दिया जो खबर चल रही है वह 5 जनवरी, 2019 को यूट्यूब पर प्रकाशित की गई थी।

सिरमौर जिला के ददाहू के पास एक निज बसी स्कूल 5 जनवरी, 2019 को खाई में लुढ़क गई थी। हादसे में छह बच्चों सहित बस चालक की भी मौत हो गई थी। आज सुबह-सुबह किसी ने उस पुराने हादसे की खबर का लिंक शेयर करना शुरू कर दिया। लोगों ने भी बिना पड़ताल किए पुराने हादसे की खबर पर विश्ववास कर लिया और अवाह को बल मिल गया, जबकि ऐसा कोई हादसा हुआ ही नहीं था।

दोधारी तलवार है सोशल मीडिया

सोशल मीडिया एक दोधारी तलवार की तरह है, जिसके कई फायदे हैं तो उतने ही नुकसान भी हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल भी सजगता के साथ करना चाहिए। हाल ही में हमने मंडी जिला में एक उदाहरण देखा है जहां आस्था के नाम पर बुजुर्ग महिला के साथ जो बर्बरता हुई उसे उजागर करने में सोशल मीडिया का अहम रोल रहा। इसके अलावा कांगड़ा जिला में युवक को पीटने और युवती को जबरन चुंबन करने के वायरल वीडियो में भी सोशल मीडिया ने बड़ी भूमिका निभाई।

इसलिए कोई भी लिंक शेयर करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल करें ताकि खुद अफवाह का शिकार होकर दूसरे तक झूठी जानकारी शेयर न करें।

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