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HIMACHAL NAZAR :- हिमाचल की पहली सबसे कम उम्र की टैक्सी ड्राइवर रवीना हो, या नौ तरह के व्हीकल चलाने वाली पूनम नेगी या फिर एचआरटीसी (hrtc) की पहली महिला ड्राइवर सीमा ठाकुर ये सभी हिमाचल की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। सभी ने परिवार के खातिर उस पेशे को रोजगार के लिए अपनाया जिस पेशे को लड़कियों के लिए नहीं माना जाता। फिर भी इन्होंने चालक को बतौर रोजगार और व्यवसाय शुरू किया। आज बात करते हैं एक नई प्रेरणा स्नेह (sneh) की जो संभवतः महिंद्रा की वर्कशॉप में बतौर इलेक्ट्रिशियन काम करने वाली पहली महिला हैं। स्नेह की कहानी समाज सेवी संजय शर्मा ने अपनी फेसबुक वाल पर शेयर की है…

दोस्तों, चलो आज आपको एक ऐसी बिटिया से मिलवाता हूं जो अपने आप मे एक मिसाल है। जैसा नाम वैसा काम यानी नाम स्नेह। दोस्तों आज जब अपनी गाड़ी लेकर जब जेएस ग्रोवर ऑटोमोटिव महिंद्र की हटवास वर्कशॉप ( नगरोटा) (J S Grover Automotives, Kangra : NH 154, VPO: HATWAS) पहुंचा। गाड़ी की किसी समस्या को लेकर। वहां गेट पर वर्कशॉप के जरनल मैनजर जोकि मूलतः बंगाली हैं मिल गए।

हाल चाल के बाद उन्होंने गाड़ी वर्कशॉप भिजवा दी और कहीं बाहर काम से निकल गए। मैं पहले ऑफिस की तरफ गया फिर वहां से गाड़ी को देखने वर्कशॉप की तरफ हो लिया। जैसे ही वर्कशॉप में दाखिल हुआ तो लगभग वर्कशॉप के सभी कर्मचारी जो सब के सब युवा हैं मुझसे मिलने आ गए और हाल चाल बता व पूछ कर अपने-अपने काम पर लग गए।

इतने में स्कॉर्पियो गाड़ी जो वहां मरम्मत के लिये आयी थी उस पर नजर पड़ी व नजर उस मरम्मत करने वाली उस युवती पर पड़ी जो स्कॉर्पियो की सर्विस का काम कर रही थी। मुझे लगा जैसे यह नजरों का धोखा है। वजह मैं पिछले कई सालों से महिंद्रा की गाड़ी इस्तेमाल कर रहा हूं और मेरा आना-जाना भी अकसर लगा रहता है। मैंने आज तक कभी किसी एकमात्र युवती को वर्कशॉप में किसी गाड़ी की सर्विस करते नहीं देखा।

हां अन्य स्टाफ जैसे रिशेप्सन या सेल में तो बहुत मिल जाएंगी, लेकिन डांगरी पहन कर अपने हाथ काले किए हुए और हाथ में टूल लिए मैंने पहली बार किसी युवती को देखा। मुझसे रहा नहीं गया और मैने वहीं पास खड़े मैनेजर से बात करी और उस युवती को मुझसे मिलवाने के लिए गुजारिश की । मैनेजर साहेब तुरंत स्नेह को बुला कर पास ले आए और मेरा परिचय उस युवती को दिया। मैंने स्नेह बिटिया से बड़े प्यार से उसके काम व हिम्मत की सराहना कि ।

मैंने आगे स्नेह से पूछा कि वो कहां से है तो उसने बताया कि वो शाहपुर के साथ लगते गांव मनेयी से है। मैंने उससे उसके माता-पिता के बारे में पूछा तो उसने जो बताया उसे सुनते ही मेरी आंखें जैसे फटने को हो गई। स्नेह जब 4 साल की रही होगी तब उसके माता-पिता का देहांत हो गया था। अपने 8 भाई बहनों में वो चौथे नंबर पर है। उसके भाई ने ही उसे औद्योगिक शिक्षा दिलवाई और यहां तक पहुंचने में मदद की । आज स्नेह को यहां काम करते हुए लगभग 1 महीना हो चला है , लेकिन महिंद्रा वर्कशॉप में काम करने वाले अन्य सभी लोग उसकी मेहनत व लग्न देख कर परेशान हैं कि कहां से लाई है यह बेटी इतना बड़ा जज्बा, लेकिन मैं समझ गया था कि कहां से आया यह जज्बा।

दरअसल स्नेह ने बड़ी गुरबत झेली व देखी है, दोस्तों मुझे स्नेह से मिलकर बड़े गर्व की अनभूति हो रही है। यह जानकर की पूरे हिमाचल में वो पहली बेटी है जो इस तरह जिस फील्ड में सिर्फ पुरुष हीनकाम करते हों वहां काम कर रही है। हालांकि मुझसे बात करते हुए बिटिया के कई बार आंसू भी छलके पर उसने बड़ी सफाई से उन्हें छिपा लिया । मैं धन्यवादी हूं महिंद्रा के जरनल मैनेजर सहेब व सहायक जरनल मैनजर सहेब का जिन्होंने इस हीरे को पहचाना व इसे यहां महिंद्रा वर्कशॉप में काम दिया ,खैर 70 या 80 युवकों के बीच एक विटिया को मैकेनिक का काम करते देख मुह से यही निकला बेटी है अनमोल

पूनम नेगी जिनके पास हैं नौ तरह के लाइसेंंस

पूनम नेगी किन्नौर जिला के रिकांगपियो की रहने वाली हैं। खास बात यह है कि पूनम टैक्सी से लेकर ट्रक और अर्थ मूवर तक चलाती हैं। इनके पास नौ तरह की अलग-अलग छोटी और बड़ी गाड़ी चलाने के लाइसेंस हैं। वैसे तो पूनम नेगी टैक्सी चलाया करती हैं, लेकिन सेब सीजन में पूनम ट्रक चलाती हैं। इन्होंंने अपने चाचा से ड्राइविंग सीखना शुरू की। हिमाचल में नौ तरह के लाइसेंस बनते हैं और पूनम नेगी के पास सभी हैं। अब उनके पास सिर्फ प्लेन और ट्रेन के ही लाइसेंस नहीं है। पूनम को दि ट्रकर पूनम भी कहते हैं।

रवीना ने घर चलाने के लिए थामी टैक्सी

मात्र 20 साल की उम्र में घर चलाने के लिए मंडी जिला के जोगिंद्रनगर की रवीना ने टैक्सी थामी थी। वह संभवतः हिमाचल प्रदेश की कम उम्र की टैक्सी डाइवर थी। वैसे तो वह आर्मी में जाना चाहती थीं, लेकिन पिता की मौत के बाद घर खर्च चलाने के लिए उन्होंने टैक्सी चलाना शुरू की। विश्व भर में प्रसिद्ध पर्यटन नगर मनाली की वह इकतौली महिला टैक्सी ड्राइवर थीं। उनके पिता ने ही उन्हें गाड़ी चलाना सिखाया था। आस-पड़ोस के लोगों ने तंज भी कसे, लेकिन रवीना ने किसी की तरफ ध्यान नहींं दिया और उन्हें उनकी मां से भी पूरा सहयोग मिला।

सीमा एचआरटी की पहली महिला ड्राइवर

सोलन जिला के अर्की की रहने वालीं सीमा ठाकुर हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की पहली महिला ड्राइवर हैं। सीमा ठाकुर ने भी पिता से ही ड्राइविंग के गुर सीखे और 2016 से ही एचआरटीसी में सेवाएं दे रही हैं। हालांंकि तंग नज़र लोगों को लड़की के बतौर चालक प्रोफेशन चुनने में आपत्ति भी हुई, लेकिन उन्हें माता-पिता से भरपूर सहयोग मिला। हालांकि सीमा के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं उधर, शुरुआत में सीमा ठाकुर को शिमला में एचआरटीसी की छोटी टैक्सी चलाने के लिए दी गई थीं, जबकि उनके पास बस चलाने का लाइसेंस भी है।

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