Monday, September 20, 2021
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सरकारें नाकाम रहीं तो अब लोग ज़हर देकर मार रहे बंदर-मवेशी

HIMACHAL NAZAR | हिमाचल में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए सरकारें करोड़ों रुपए फूंक चुकीं हैं। बंदरों की समस्या तो आज तक नहीं सुलझ सकी, लेकिन हजारों लोगों की खेती की जमीन बंजर जरूर हो गई। बंदरों के साथ-साथ सड़कों में घूमते बेसहारा मवेशी भी उतनी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिस तेजी से बंदरों के डर के चलते लोग खेती छोड़ रहे हैं। अब जब कुछ न कर सकीं तो लोगों ने ज़हर देकर बंदरों को मारना शुरू कर दिया है।

हालांकि हिमाचल में बंदरों को वर्मिन (उत्पाती जंतु) घोषित किया गया है पर इसका मतलब कतई नहीं की बंदरों को ज़हर देकर तड़पा-तड़पा कर मारा जाए। यह मसला काफी गंभीर है। सरकारें जनता की ज्वलंत समस्याओं या यूं कहें की बंदरों की समस्या सुलझाने में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा देती है। यह करोंड़ों रुपए सालों से बहाया जा रहा है सटर्लाइजेशन यानी बंदरों को बांझ करने के नाम पर। जब इससे भी काम नहीं बन रहा तो बंदरों को केंद्र सरकार ने वर्मिन घोषित कर दिया।

उत्पाती बंदरों को मारने की इजाजत केंद्र सरकार से आ गई। दरअसल इजाजत तो केंद्र सरकार ने दे दी पर लोग इतने तंग आ चुके थे कि लोगों ने बंदरों को ज़हर देकर मारना शुरू कर दिया है। जो कि न तो वैज्ञानिक तरीका और न ही हल। केंद्र सरकार हिमाचल की 169 तहसीलों-उपतहसीलों में से 91 में बंदरों को वर्मिन) घोषित किया है। मतलब इन जगह बंदर मारे जा सकते हैं।

मंडी जिला के कलखर में ज़हर देकर मारे गए लावारिस बैल

इन जगहों पर बंदरों को मारने की इजाजत 21 फरवरी 2020 तक ही दी गई है, लेकिन अब लोगों ने बंदरों के साथ सड़क पर घूमते बेसहारा पशुओं को भी ज़हर देकर मौत देने का काम शुरू कर दिया है। अब जब सरकारें जनता के ही पैसे का सदउपयोग कर समस्या सुलझाने में नाकाम रही है तो लोग इस हद तक पहुंच चुके हैं जो कि गंभीर विषय है।

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