Wednesday, August 4, 2021
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लड़कों संग कंचे खेलने से लेकर आईपीएस बनने तक का सफर

HIMACHAL NAZAR | आज आपको बताते हैं हिमाचल की महिला आईपीएस शालिनी अग्निहोत्री के बारे में। 2012 बैच की आईपीएस शालिनी अग्निहोत्री के बारे में आप पहले से बहुत कुछ जानते होंगे, लेकिन शालिनी अग्निहोत्री के बचपन में कंचे खेलने से लेकर आईपीएस बनने तक के सफरनामे में कई पहलुओं से अनजान होंगे। कैसे एक बेटी अपनी मां पर कसे गए तंज से इतनी आहत हुई कि उसने डीसी बनने की ठान ली और बिना कोचिंग यूपीएसएसी परीक्षा दी और आईएएस की बजाय आईपीएस बन गईं। साथ ही शालिनी अग्निहोत्री के तक के सफर और उनकी कार्य क्षमता के कुछ अनसुने किस्से भी बताएंगे, जो हिमाचली ही नहीं देश की लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।

लड़कों के साथ क्रिकेट और कंचे खेलती थीं

शालिनी अग्निनहोत्री का जन्म हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला के ठठल गांव में रमेश अग्निहोत्री और शुभलता अग्निहोत्री के घर 14 जनवरी, 1989 को हुआ। बचपन से ही टॉम ब्यॉइश जैसी छवी थी। पड़ोस के लड़कों के साथ ही गुल्ली डंडा, पिट्ठू, कंचे और क्रिकेट खेला करती थीं। टीम में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने वाली इकलौती लड़की हुआ करती थीं। शालिनी की माता शुभलता उन्हें कहती थीं कि तू लड़की है लड़कियां कंचे नहीं खेलतीं। शालिनी मां से कहतीं तो क्या हुआ। पड़ोसी भी शालिनी को लड़का ही कहते और उनकी मां को कहते देखो आपका लड़का कैसे खेल रहा है जंगल में।

शालिनी की मां को कहा तुम डीसी लगी हो

शालिनी अग्नहोत्री अपनी माता के साथ एचआरटीसी से सफर कर रही थीं। संयोग से शानिली के पिता भी उसी बस में बतौर कंडक्टर ड्यूटी बजा रहे थे। शालिनी की माता सीट पर बैठी थींं। उनके पीछे वाली सीट पर बैठे व्यक्ति ने सहारा लेने के लिए शालिनी की माता की सीट के पीछे हाथ रखा था। इस पर शालिनी की माता ने व्यक्ति को हाथ वहां से हटाकर साइड से सहारा लेने के लिए कहा। एक-दो बार बोलने के बाद व्यक्ति ने खीजते हुए कहा ‘आपकी बात क्यों सुनूं क्या डीसी लगी हो’। बस इतना ही कहना था और डीसी शब्द शालिनी के दिमाग में बैठ गया। हालांकि उस समय शालिनी को डीसी का मतलब तक पता नहीं था, लेकिन एक सवाल दिल में घर कर चुका थी कि ये डीसी कौन होता जिसकी इतनी चलती है।

डिबेट में बोलीं मुझे आईएएस बनना है

जैसे-जैसे शालिनी बड़ी होती गईं उन्हें डीसी, एसपी और एडमिनिस्ट्रेशन का मतलब समझ आने लगा। खाली समय में शालिनी हमेशा यूपीएससी परीक्षा के बारे में ही रिसर्च करती रहती थीं। आप इस बात का अंदाजा खुद ही लगा सकते हैं कि उस वाक्या का शालिनी के दिल पर कितनी गहरा असर हुआ था। दसवीं 92 फीसदी अंक हासिल करने वाली शालिनी जब एक डिबेट में गई तों उस समय भी जब उनसे पूछा गया कि क्या बनना है तो उन्होंने कहा कि आईएएस बनना है।

दसवीं में 92 तो 12वीं में 77 फीसदी अंक

दसवीं की परीक्षा में शालिनी ने 92 फीसदी अंक हासिल किए। हालांकि 12वीं में कम अंक हासिल करने की वजह से वह हताश थीं। शालिनी 12वीं में 77 फीसदी अंक पाने में कामयाब रही थीं जो उनकी अपेक्षा और मेहनत से काफी कम था। 12वीं में कम अंक हासिल करने से हताश शालिनी के घरवालों ने तब भी कहा था कि परेशान होने की जरूरत नहीं हमें पता तो तू जो भी करेगी अच्छा करेगी। शालिनी ने दसवीं और 12वीं की पढ़ाई डीएवी धर्मशाला से ही पूरी की। इसके बाद चौधरी श्रवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर से बीएससी और एमएससी पंजाब विश्वविद्यालय लुधियाना से की और गोल्डमेडलिस्ट रहीं।

बिना कोचिंग पास की यूपीएससी परीक्षा

बिना कोचिंग के ही शालिनी ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास की। इसके लिए करीब डेढ़ साल तक तैयारी में जुटी रहीं और रोजाना पांच घंटे की पढ़ाई की। यूपीएससी की परीक्षा में शलिनी अग्रिनहोत्री की आल इंडिया रैंकिंग 285 रही और आईपीएस के लिए सिलेक्ट हुई। हैदराबाद पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान भी उन्हें बेस्ट ट्रेनी कैडेट्स के खिताब से नवाजा गया। यह शालिनी के साथ-साथ हिमाचल के लिए भी बड़ी उपलब्धि थी।

शालिनी ने सुलझाए ब्लाइंड रेप और मर्डर केस

करीब दो साल तक एसपी कुल्लू रही शालिनी अग्निहोत्री नशा माफिया के लिए खौफ का पर्याय बन चुकी थीं। मात्र दो साल तक कुल्लू जिला की पुलिस कप्तान रहीं शालिनी अग्निहोत्री के समय 250 किलो चरस पकड़ी गई और आठ दर्जन तस्करों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया। भुतंर में आठ साल की बच्ची का बलात्कार मामला हो चाहे रूसी महिला से गैंगरेप या जापानी महिला से बलात्कार सभी मामलों को एसपी शालिनी और उनकी टीम ने दिन रात एक कर सुलझाया।

http://यह भी पढ़े कुल्लू के वर्तमान एसपी के बारे में

रेप केस सुलझाने के लिए खंगाली वोटर लिस्ट

रूसी और जापानी महिला के साथ कुल्लू और ओल्ड मनाली में रेप केस सुलझाकर सुर्खियां बटोर चुकीं एसपी शालिनी अग्रिनहोत्री की कार्यशैली का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि रेप केस सुलझाने के लिए सीसीटीवी फुटेज अमरीका तक भिजवा दी गई और इसके लिए 35 हजार रुपए भी खर्चे। यही नहीं, जापानी महिला से रेप मामले में तो गाड़ी में लगा स्टीरियो ही सुराग के तौर पुलिस को बताया गया था, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही मामले को सुलझा लिया गया। इसके अलावा प्रोबेशनर पीरियड में ही शिमला में 103 टनल के पास युवती से हुए गैंगरेप मामले और धर्मशाला में फर्जी बलात्कार मामले को सुलझाने में भी उनकी भूमिका रही थी। उस धर्मशाला में शालिनी बतौर एएसपी सेवाएं दे रही थीं।

युवाओं को सुबह-सुबह फ्री कोचिंग

आमतौर पर जिला पुलिस की कमान संभालने का काम काफी मुश्किल भरा रहता है, लेकिन आईपीएस शालिनी अग्रिनहोत्री ने बतौर कुल्लू एसपी रहते हुए एक कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम का नाम था सहभागिता आपकी और हमारी। इसके तहत वह सबुह 8 बजे ही कुल्लू ब्वायज स्कूल पहुंच जातीं और युवाओं को यूपीएससी और हिमाचल प्रदेश अलाइड सर्विसेज की तैयारी करवातीं। आईपीएस शालिनी एएसपी यूटी शिमला, एएसपी कांगड़ा, कमांडेंट फर्स्ट एचपीएपी जुन्गा शिमला, एसपी नार्कोटिक्स सीआईडी शिमला, एसपी कुल्लू सेवाएं देने के बाद इन दिनों कमांडेंट फर्स्ट आईआरबीएन बनगढ़ तैनात हैं।

आईपीएस संकल्प शर्मा के साथ विवाह

ट्रेनिंग के दौरान ही शालिनी अग्रिनहोत्री और संकल्प शर्मा एक दूसरे को पसंद करने लगे थे, लेकिन सात साल तक अलग-अलग राज्यों में जिम्मदारियां संभालने के बाद मार्च 2018 में आईपीएस शालिनी अग्रिनहोत्री और आईपीएस संकल्प शर्मा का विवाह हुआ। उस समय शालिनी कुल्लू जिला में तो संकल्प शर्मा यूपी के बस्ती जिला में बतौर एसपी तैनात थे।

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