Monday, September 20, 2021
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क्यों उठ रहे हिमाचल में 100 फीसदी आबादी के कोरोना वैक्सीनेशन पर सवाल, पढ़िए जवाब

हिमाचल ने कोविड वैक्सीनेशन में देश भर में कम से कम एक डोज लगाने का लक्ष्य सबसे पहले हासिल कर लिया है। बीते दिनों इसे लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी हिमाचल की जनता के साथ वैक्सीन संवाद नाम से कार्यक्रम किया। ये कार्यक्रम वर्चुअल था। वैक्सीनेशन को लेकर सरकार ने कहा कि हमने अपनी लक्षित आबादी को देश भर में सबसे पहले कोरोना वैक्सीनेशन की पहली डोज लगा दी है। इसी को लेकर कुछ लोग और खासकर पत्रकार व विपक्ष कई तरह की बातें कर रहा है।

एक पूर्व विधायक जो अपनी असभ्य भाषा के लिए जाने जाते हैं उन्होंने भी वैक्सीनेशन की इस डोज के कार्यक्रम पर लिखा था ‘मैंने तो वैक्सीन नहीं लगवाई’ लेकिन अगले ही दिन वो भी वैक्सीन लगवा लेते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह थी कि उन्होंने वैक्सीन घर पर लगवाई।

इसी तरह से कई पत्रकार बंधु, बुद्धिजिवी वर्ग और अन्य कई तरह की विचारधारा के लोगों भी इस धारणा में शामिल हैं। इस लेख के माध्यम से यही कहने की कोशिश हो रही है कि लक्ष्य और 100 फीसदी वैक्सीनेशन के बीच में क्या समानता है जो बताने में सभी अखबारें, पत्रकार और यहां तक कि सरकार भी एक तरह से मेरी नजर में नाकामयाब रहे। इसी पूरे मसले को समझाने और समझने के लिए ये आर्टिकल आप पढ़ रहे हैं कि आखिर माजरा क्या है ?

वैक्सीनेशन और टैबलेट के बीच का फर्क

दरअसल, जब भी कोई बड़ा टीकाकरण अभियान देश भर में लागू किया जाता है तो एक तय रणनीति बनाई जाती है। क्योंकि वैक्सीन आपकी दवाई या जिसे आप टैबलेट कहते हैं उसकी तरह नहीं होती। वैक्सीन को एक तय तापमान में रखना जरूरी होता है। भारत 135 करोड़ से ज्यादा आबादी वाला देश है और इस तरह के बड़े वैक्सीनेशन अभियान के लिए रणनीति बनाई जाती है।

यदि आपको याद होगा तो कुछ युवा जो इस लेख को पढ़ रहे हैं उन्होंने कुछ साल पहले ही एमआर वैक्सीनेशन अभियान के बारे में सुना होगा। कुछ पाठक ऐसे भी होंगे जिन्होंने खुद मिजल्स-रूबैला वैक्सीन लगवाई होगी। ये वैक्सीनेशन अभियान भी पूरे देश में एक साथ चला था।

कैसे पता करते हैं किसे लगाएंगे टीका ?

किसी भी राष्ट्रीय स्तरीय टीकाकरण अभियान से पहले यह पता किया जाता है कि आखिर टीका कितनी आबादी को लगना है। इसके बाद अगली रणनीति तैयार की जाती है। कोरोना वैक्सीनेशन में भी इसी तरह यह पता किया गया कि आखिर कितनी आबादी को टीका लगाया जाना है। देश में 2011 के बाद जनसंख्या गणना नहीं हुई। हर दस साल में देश में जनसंख्या गणना होती है।

कोरोना के कारण जनसंख्या गणना प्रभावित हुई और साल 2021 में नहीं हो पाई। हालांकि अन्य विभागों के द्वारा अपनी-अपनी योजनाओं के लिए आंकड़े जुटाए जाते हैं। इसी तरह देश में आर्थिक और सांख्यिकी निदेशालय भी समय-समय पर आंकड़े जुटाता है। आप ज्यादा जानकारी के लिए इस निदेशालय के आंकड़े भी देख सकते हैं।

ये विभाग देता है किसी भी अभियान के लिए आंकड़े

खैर अब मुद्दे की बाद पर आते हैं। इसी सांख्यिकी निदेशालय ने हिमाचल को बताया कि उनके हिसाब से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल में 18+ की आबादी 53 लाख 77 हजार 820 है, जिसे टीके लगाए जाने हैं। हिमाचल ने भी इस लक्ष्य के साथ कोविड वैक्सीनेशन का काम शुरू किया। हिमाचल में वैक्सीनेशन को लेकर तमाम तरह की दिक्कतें थीं।

कोरोना वैक्सीन को लेकर अफवाहें तो थी हीं, लेकिन भौगोलिक परिस्थित भी हिमाचल के लिए बड़ी बाधा थी। इन सभी बाधाओं का पार करते हुए हिमाचल के कोरोना योद्धाओं, फ्रंट लाइन वर्कर्स और विशेष तौर पर हिमाचल की जनता ने इसे सफल बनाया। ऐसे में ये कहना कि हिमाचल में 100 फीसदी वैक्सीनेशन नहीं हुआ ये उपरोक्त तीनों वर्गों का अपमान है।

क्योंकि लक्ष्य वही हासिल किया जाता है जो सामने हो। सांख्यिकी विभाग ने जो आंकड़ा दिया वो हिमाचल ने 28 अगस्त को ही हासिल कर लिया था। लक्ष्य से ऊपर इसलिए काम हो रहा क्योंकि एक तो देश में जनसंख्या गणना नहीं हुई। दूसरी बात यह है कि दूसरे विभागों में आंकड़े एकदम स्टीक नहीं होते हैं और जो आंकड़े होते हैं वो एक वर्ग विशेष से जुड़े होते हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े ?

दरअसल, हिमाचल ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ये उपलब्धि सरकार को तो दी जा सकती है, लेकिन इसके असल हकदान हिमाचल के कोरोना योद्धा, फ्रंट लाइन वर्कर्स और विशेष तौर पर हिमाचल की जनता है। उन्होंने ये काम किया और वैक्सीनेशन को लेकर फैली अफवाहों को सिरे से खारिज भी किया।

सरकार को ये श्रेय जरूर जाता है कि उन्होंने कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर कुशल प्रबंधन दिखाया, क्योंकि वैक्सीनेशन के लगातार बदलते फॉर्मेट की जानकारी सभी को लगातार पहुंच रही थी।

आलोचना करने वाले वैक्सीन क्यों नहीं लगवा रहे

अब सवाल यह है कि आलोचना कौन कर रहे हैं। आलोचना करने वाले लोग देश और प्रदेश के हितकारी नहीं हो सकते। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्सीन ही अभी तक कोरोना का कारगर उपाय है। इसलिए जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई उनसे ये पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने किन कारणों के चलते वैक्सीनेशन नहीं करवाया।

क्या ये लोग नहीं चाहते कि कोरोना खत्म हो ? या इस संक्रमण को फैलने के अवसर दिए जाते रहें ? ऐसे लोग जो वैक्सीन नहीं लगवा रहे या वैक्सीन नहीं लगवाने वालों को जानने के बाद भी ये बातें कह रहे हैं, वो विकास के हितकारी नहीं हो सकते हैं।

लक्ष्य और 100 फीसदी के बीच का झोल

दरअसल, होता यह है कि सरकारी विभागों में एक तय टारगेट के हिसाब से काम होता है। अब जो टारगेट था वो लक्ष्य था। इसे हिमाचल ने हासिल कर लिया। ऐसे में सरकारी विभागों ने भी दरअसल, अपने सरकारी प्रेस नोट में भी यही लिखा था, लेकिन मीडिया ने ना अपनी भूमिका समझी ना आपको ये ढंग से समझाया। इसलिए हमें ये आर्टिकल लिखना पड़ा।

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